और गुरदास मान फफक कर रोने लगे (खास वीडियो)


गूरदास मान न सिर्फ पंजाबी गायकी की जीती जागती विरासत हैं, बल्कि पंजाबी गीतकारी के स्तर को कायम रखने में भी उनकी अहम भूमिका है। गुरदास के लिखे गीत कई सामाजिक बुराईयों के खिलाफ मुहिम बन कर खड़े हुए हैं और जो काम बड़े बड़े प्रचारक या नेता नहीं कर सके गुरदास के गीतों ने उन्हें भी कर दिखाया है।

बीते साल में उनका एक गीत कुड़िए इतना चर्चित हुआ के लोग इसे सुनकर आज भी भावुक हो जाते हैं। लोग तो छोड़िए खुद इस गीत के लिए गुरदास कितने भावुक हैं, मैंने 2007 की आखिरी शाम को अलविदा कहने के लिए रखे एक लाइव कंसर्ट में अपनी आखों से देखा। लोगों की फरमाइश पर गुरदास अपना सबसे ज्यादा चर्चित गीत 'छल्ला' गाने लगे। हाई स्केल के इस गीत का अभी अलाप ही शुरू किया था कि एक नन्हीं सी बच्ची हाथ में उनकी फोटो लेकर मंच के बिल्कुल सामने आकर खड़ी हो गई। गुरदास ने उसे मंच पर बुलाया और गले से लगा लिया। फिर एकदम से ऊंचे सुर को छोड़ कर निचले सुर पर आते हुए कुड़िए गीत को गाना शुरू किया। जैसे जैसे वो गीत की एक एक पंक्ति गाते गए, उनकी आखें में समंदर का तूफान उछाल पर आता गया। कब आंसूओं की सुनामी उनमें से बहने लगी पता न चला। गीत की आखिरी पंक्तियों पर आते आते वह एक दम नीचे नन्हीं बच्ची के कदमों में लेट गए। मेरे ख्याल से इससे बढ़िया ऑटोग्राफ आज तक किसी फैन को नहीं मिला होगा। फिर गुरदास ने उस बच्ची को उठकर गले लगा लिया। काफी पलों तक हजारों के पंडाल में सन्नाटा छाया रहा। उन्होंने बच्ची के हाथ में पकड़ी अपनी तस्वीर को उसके हाथ सहित अपने हाथ में लेकर ऑटोग्राफ दिया। उसके बाद वह प्रोग्राम को आगे नहीं बढ़ा सके और पैकअप कर दिया। अपनी गायकी के साथ अपनी भावुकता से वह लोगों को भ्रूण हत्या के खिलाफ गहरा संदेश दे गए। आप सब दोस्तों के लिए उस गीत का वीडियो खास तौर पर पेश कर रहा हूं। साथ ही गीत के बोल हिंदी लिपियांतर भी कर रहा हूं। अगर किसी शब्द के बारे में आप पूछना चाहते हैं, तो कमेंट्स में जरूर पूछें। मुझे वर्णन करने में खुशी होगी।



कुड़िए किस्मत थुड़िए तैनू ऐना प्यार देआं
अपने हिस्से दी दुनिया मैं तैथों वार देआं

तू जम्मी तां मापे कहन पराई एं धीए
सोहरे घर विच कहन बेगानी जाई एं धीए
केहड़े घर दी आखां तैंनू की सत्कार देआं
अपने हिस्से दी दुनिया मैं तैथों वार देआं

इक धोबी लई सीता मां नू राम विसार गए
जुए विच द्रौपदिए तैनू पांडो हार गए
जी करदा मैं अपनी किस्मत तैनूं हार देआं
अपने हिस्से दी दुनिया मैं तैथों वार देआं

सत्त भरा एक मिर्जा बाकी किस्साकारा ने
कल्ली साहिबा बुरी बनाती मर्द हजारां ने
कवियां दी इस गल्ती नू मैं किवें सुधार देआं
अपने हिस्से दी दुनिया मैं तैथों वार देआं

मरजाने दे अंदर वसदी कुड़िए जिउंदी रह
तू कमली मैं कमला तेरा गीत लिखाउंदी रह
सदा सुहागन थीवें तेरी नजर उतार देआं
अपने हिस्से दी दुनिया मैं तैथों वार देआं

Deep Jagdeep

Deep Jagdeep Singh a is Poet, Columnist, Screen Writer, Lyricist and Film Critic. He writes in Punjabi, English and Hindi Google

3 comments:

  1. अच्छा लगा यह पढ़ना...लिप्यांतर की जरुरत भावों के आगे मुझे नहीं हुई. आभार,

    ReplyDelete
  2. बढ़िया पोस्ट, सुंदर शैली और एक बेहद मानवीय संदेश। मेरे घर में भी पंजाबी बोली जाती है इसलिए गीत के बोल समझने में कोई दिक्कत नहीं हुई। मजा आया पढ़ने में, धन्यवाद।

    ReplyDelete
  3. Hey keep posting such good and meaningful articles.

    ReplyDelete