सफर...


मैं सुलझी हुई
अनसुलझी
पहेली हूं
ना सोना, ना जगना
ना रोना, ना हसना
ना दर्द है, ना ठीक हूं
ना जख़्म है, ना मरहम है
नज़र, ज़ुबान, सुनने की ताकत
जिस्म मे से घटा दी है
मैं उसमें हूं
लेकिन उसका हिस्सा नहीं
मैं बुरा नहीं
पर नापसंद हूं
रुका हूं, पर सफर में हूं

तलाश है
पर खोया कुछ भी नहीं
मंजिल रस्ते में बदल गई
और नदी का पानी कांच
आग ठंडी बर्फ हुई
ठंड में ठिठुरता प्यासा हूं
रुका हूं, पर सफर में हूं

हर्फ हैं,
पर लफ्ज़ और वाक्य ग़ुम हैं
कलम है, स्याही है
कोरे सफे नहीं मिल रहे

लिखूंगा
पेड़ों पर
फूलों पर
पत्तों पर
सूरज पर
चांद पर
धरती पर
अंबर पर
जिस्मों पर
रुहों पर

उस दिन लिखूंगा
जिस दिन ये सब कोरे मिलेंगे
फिलहाल रुका हूं, पर सफर में हूं

Deep Jagdeep

Deep Jagdeep Singh a is Poet, Columnist, Screen Writer, Lyricist and Film Critic. He writes in Punjabi, English and Hindi Google

10 comments:

  1. लिख कर तो रख लो...जब कोरे मिलेंगे कट पेस्‍ट कर देना।
    सुंदर कविता है भई।

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  2. उस दिन लिखूंगा
    जिस दिन ये सब कोरे मिलेंगे
    फिलहाल रुका हूं, पर सफर में हूं

    अच्छा है भाई.

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  3. बहुत उम्दा!!

    आपको एवं आपके परिवार को दीपावली की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाऐं.


    समीर लाल

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  4. ek suljhi hui prastuti,ulhjan bhare jeevan ki,

    laajawaab kavita ke liye badhai...

    saadar
    hem jyotsana

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  5. नशेमन पर नशेमन इस कदर तामीर करता जा।
    कि बीजली गिरते गिरते आप ही बर्बाद हो जाए।।

    सादर
    श्यामल सुमन
    09955373288
    मुश्किलों से भागने की अपनी फितरत है नहीं।
    कोशिशें गर दिल से हो तो जल उठेगी खुद शमां।।
    www.manoramsuman.blogspot.com

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  6. कहां लिखूं, ये सवाल है?
    उससे कहो, वह आंखें बंद करेगी, बरौनियों और भवों के बीच, आंख के आवरण पर लिखना...

    अब यह मत पूछना कि 'उसे' कहां से लाऊं?

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  7. दीप जी
    ......... उस दिन लिखूंगा
    जिस दिन ये सब कोरे मिलेंगे
    फिलहाल रुका हूं, पर सफर में हूं .
    एक लंबे समय से खामोश हैं आप कुछ नया भी पोस्ट कर दीजिये.

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  8. to huzoor aap haiN yahaaN..!
    musalsal safar meiN hona hi zindgi
    ki pukht`gi ki pehchaan hai, tasdeeq hai iss baat ki k aashaaeiN, sambhaanvaaeiN, aur andar kaheeN samvednaaeiN zinda haiN...
    rvaani hi zindgaani hai mere dost.
    Ek achhi nazm pr mubaarakbaad .
    ---MUFLIS---

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  9. one day u'll surely get ur destination....its really a nice poem.

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